अब प्रदेश में डूब से निकली वन भूमि पर किसान खेती नहीं कर पायेंगे

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: DD                                                                         Views: 237

Bhopal: 13 अप्रैल 2019। प्रदेश में डूब से निकली वन भूमि पर अब किसान खेती नहीं कर पायेंगे। इस संबंध में राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग ने अपने दो साल पुराने आदेश में संशोधन कर दिया है।

दरअसल जल संसाधन विभाग ने दो साल पहले 23 दिसम्बर 2017 को डूब से निकली भूमि पर कृषि कार्य हेतु पट्टे की दर प्रति एकड़ निर्धारण के संबंध में आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया था कि बांध के डूब क्षेत्र से निकली भूमि को कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिये जाने में अनियमिततायें बरती जा रही हैं। इसलिये डूब से निकली भूमि को कृषि कार्य हेतु दिये जाने हेतु पांच बिन्दुओं का पालन किया जाये। एक, मप्र सिंचाई अधिनियम 1931 की धारा 64 के अंतर्गत जारी कार्यकारी निर्देशों का पालन करते हुये ही डूब से निकली भूमि को कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिया जाये। दो, कार्यकारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कृषक को पट्टे पर दी जाने वाली भूमि का क्षेत्रफल अन्य भूमि सहित 5 एकड़ से अधिक एवं ऐ एकड़ से कम नहीं होना चाहिये। तीन, अन्य निर्देशों के तहत पट्टों का आवंटन सभी पात्र व्यक्तियों को करने के पश्चात शेष बची भूमि का आवंटन खुली नीलामी से किया जाये एवं नीलामी की न्यूनतम दर एक हजार रुपये प्रति एकड़ निर्धारित की जाये। चार, उक्त निर्देशों के तहत यदि कोई पट्टेदार निर्धारित समय के अंदर पट्टे की राशि जमा नहीं करता है तो उसे भविष्य में भूमि पट्टे पर नहीं दी जायेगी। पांच, डूब से निकली भूमि कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिये जाने से राजस्व प्राप्ति की रसीद निर्धारित प्रपत्र एमपीटीसी-6 फार्म में ही दी जाये एवं प्राप्त राजस्व को तत्काल शासकीय खाते में जमा की जाये। छह, डूब से निकली भूमि कृषि कार्य हेतु आवंटित किये जाने के लिये विज्ञापन जारी करते समय पर्याप्त सावधानी बरती जाना आवश्यसक है।

वन भूमि भी पट्टे पर दे रहे थे :
दो साल पहले जारी उक्त आदेश के तहत प्रदेश के जिलों में अधिकारी डूब से निकली वन भूमि भी किसानों को खेती हेतु पट्टे पर दे रहे थे। इस दौरान कुछ जिलों के वन कार्यालयों ने आपत्ति की कि वन संरक्षण कानून के तहत वन भूमि पर कोई गतिविधि नहीं हो सकती है। इसी कारण से अब जल संसाधन विभाग को अपने दो साल पुराने आदेश में संशोधन करना पड़ा तथा संशोधित आदेश में प्रावधान करना पड़ा कि डूब से निकली भूमि (वन भूमि को छोडक़र) को कृषि कार्य हेतु पट्टे पर दिया जाये।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि गर्मियों में जब बांध का पानी उतरता है तो डूब में आ रही बहुत सी भूमि खाली हो जाती है। इस खाली भूमि को किसानों को खेती हेतु पट्टे पर दिया जाता है। पन्ना जिले के वन कार्यालय ने पाईँअ आउट किया था कि डूब से निकली वन भूमि पर खेती नहीं हो सकती है क्योंकि ऐसी भूमि पर वन संरक्षण कानून प्रभावी होता है। इसीलिये अब हमने नया संशोधित आदेश जारी कर वन भूमि को खेती हेतु पट्टे पर देने पर रोक लगा दी है।


(डॉ. नवीन जोशी)

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