कलर्स का सामाजिक नाटक उड़ान के विजयेंद्र कुमेरिया और विधी पंड्या झीलों की नगरी भोपाल आए

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: Admin                                                                         Views: 1201

Bhopal: 11 अप्रैल 2018। बडे पैमाने पर चलने वाली बंधुआ मजदूरों की रूढि पर प्रकाश डालने वाला कलर्स का सामाजिक नाटक उडान ने उसकी आकर्षक कथा के द्वारा शुरूआत से ही उँचाई पायी है। यह कहानी शुरू होती है एक सात बरस की लडकी- चकोर (मीरा देवस्थले) के स्वतंत्र होने के सपने से और सामजिक समस्या और अन्याय के परे एक उत्कट स्वतंत्रता का सागा बन गया है और उसने 1000 शानदार एपिसोड पार किये हैं। हाल ही में उड़ान ने यह मैन्टल आगे बढाने के लिए एक लीप ली है, जिसमें चकोर और सूरज आजादगंज में मानसिक बंधुआ की समस्या से लडते है। शो की इस कहानी के बारे में बात करने के लिए और उनके अनुभव प्रशंसकों के साथ शेयर करने के लिए विजयेंद्र कुमेरिया (सूरज) और विधी पंड्या (इमली) ने आज भोपाल को भेंट दी। महेश भट्ट द्वारा प्रस्तुत किया हुआ और गुरूदेव भल्ला व धवल गडा द्वारा निर्मित उडान हर सोमवार से शुक्रवार प्रसारित होता है रात 8.30 बजे कलर्स पर।

सूरज की भूमिका निभाने का अनुभव बताते हुए, विजयेंद्र कुमेरिया ने कहा, "बदला लेने वाले नकारात्मक लडके से हक के लिए चलने वाली पत्नी की लडाई में उसका साथ देने वाले आदमी सूरज का यह पात्र बदलकर उत्क्रांत हो गया है। मानसिक बंधुआ के विरूध्द लडने में चकोर को मदद करके सूरज न ही उसकी ताकत बन गया है बल्कि उसे प्रेरित भी करता है। सूरज का पात्र साकार करने में सक्षम रहने के लिए मैं भाग्यशाली हूँ। एक प्रतिस्पर्धी के सूक्ष्म भेद जानने के लिए और एक्टिंग के लिए आवश्यक होने वाला लचिलापन पाने के लिए मैं उडान को धन्यवाद देता हूँ। भोपाल हरवक्त सज्जनतापूर्ण रहा है और यहाँ आज आने का मतलब है मुंबई के वेदर से एक स्वागतशील बदल पाना।."

शो के बारे में बताते हुए, विधी पंड्या ने कहा, "इमली का किरदार करना बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। मैं एक भोलीभाली लड़की की भूमिका साकार कर रही थी और उसमें एक रोमांचकारी बदलाव आ गया जिसमें नकारात्मक हेतू रखने वाली व्यक्ती बन गयी और उसके कृत्यों से उसकी खुद की बहन के जीवन में प्रचंड उथल-पुथल आ गयी। निजी फ्रंट पर मेरे लिए उडान ने मुझे न सिर्फ पहचान और प्रसिध्दी दी है बल्कि उसने मुझे ज्य़ादा महत्वपूर्ण बुनियाद दी है और उसके लिए मैं उनकी शुक्रगुजार हूँ। भोपाल के खाने के बारे में मैंने बहुत सुना है, और मैं यहाँ की प्रसिध्द पोहा-जलेबी का स्वाद जरूर लूँगी।"

हाल ही के सप्ताह में चकोर और सूरज गौरी को सपोर्ट करते हुए दिखाई देंगे, जिसका सपना है मुंबई जैसे आकांक्षी शहर में उसके आर्टवर्क डिजाइन का प्रदर्शन करना। तथापि, गौरी का पति छगन सपोर्टिव नहीं है और उसे उसकी पत्नी का स्वतंत्र होने का आयडिया अच्छी नहीं लगता है। चकोर और सूरज अन्य गाँववालों के साथ गौरी को उसका सपना सच करने में मदद करते है। सूरज और चकोर जब सुखी जीवन जीने का निर्णय लेते हैं तो इमली एक बूढी औरत का रूप लेकर उनके जीवन में अनुचित समस्या निर्माण करने के लिए सबकुछ करती है। दूसरी ओर, करन ओबरॉय नाम का एक बिजनेसमैन भी चकोर और सूरज के जीवन में झटके लायेगा। क्या चकोर इमली के बारे में पता लगायेगी? चकोर और सूरज करन ओबरॉय से कैसे निपटेंगे?

इसका पता लगाने के लिए, देखते रहिए उडान हर सोमवार से शुक्रवार रात 8.30 बजे सिर्फ कलर्स पर

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