बिजली उत्पादन कारखानों को मिलेगी लायसेंस फीस में छूट

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: Admin                                                                         Views: 1214

Bhopal: 15 जून 2018। राज्य सरकार प्रदेश में बिजली का उत्पादन करने वाले कारखानों को लायसेंस फीस में छूट देने जा रही है। यह छूट उन्हें 4 से 10 वर्ष की लायसेंस फीस एकमुश्त जमा करने पर 20 से 50 प्रतिशत तक मिलेगी। अभी हर साल कारखाने के लायसेस का नवीनीकरण करना होता है। इस संबंध में राज्य के श्रम विभाग के माध्यम से 56 साल पुराने मप्र कारखाना नियम 1962 में संशोधन का प्रारुप जारी कर दिया गया है जो आगामी 4 जुलाई के बाद प्रभावशील हो जायेंगे।

नवीन संशोधन के अनुसार, यदि कोई बिजली उत्पादन कंपनी अपने कारखाना के लायसेंस का नवीनीकरण हर साल न कर 4, 6, 8 या 10 वर्षों के लिये एक साथ कराता है तो उसे निर्धारित लायसेंस फीस में क्रमश: 20, 30, 40 तथा 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जायेगी।

ज्ञातव्य है कि मप्र कारखाना नियम 1962 की अनुसूची सी में बिजली उत्पादन करने वाले कारखानों का उनके द्वारा मेगावाट में उत्पादित बिजली और उसमें नियोजित कर्मचारियों के हिसाब से सालाना लायसेंस फीस दी गई है। इसमें बीस मेगावाट, 50 मेगावाट, 100 मेगावाट, 250 मेगावाट, 500 मेगावाट, एक हजार मेगावाट तथा एक हजार मेगावाट से ज्यादा उत्पादन की सारणी दी गई है तथा सारणी में 100, 250, 500, एक हजार एवं एक हजार से ज्यादा कर्मचारी नियोजित करने का भी उल्लेख है और इन नियोजित कर्मचारियों के हिसाब से सालान फीस दर्शाई गई है। 1 जनवरी 2002 की स्थिति में न्यूनतम 10 हजार रुपये एवं अधिकतम 28 हजार रुपये लायसेंस फीस है तथा इस तिथि के बाद हर तीन साल में इस लायसेंस फीस में 30 प्रतिशत की वृध्दि किये जाने का भी प्रावधान किया गया है। अभी 2017 की स्थिति में सालाना लायसेंस फीस है तथा अगली फीस में 30 प्रतिशत की वृध्दि वर्ष 2020 में होगी।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि बिजली उत्पादन कारखानों को सालाना के बजाये 4, 6, 8 एवं 10 सालों की लायसेंस फीस एकमुश्त जमा करने की सुविधा प्रदान किये जाने का प्रस्ताव है। ऐसा करने पर इन्हें लायसेंस फीस में क्रमश: 20, 30, 40 एवं 50 प्रतिशत की छूट दी जायेगी। इससे हर साल लायसेंस फीस भरने की आवश्यक्ता नहीं होगी और लायसेंस फीस में छूट भी मिल जायेगी। वैसे यह प्रस्ताव हमने दो साल पहले शासन को भेजा था जिस पर अब जाकर कार्यवाही की गई है।


डॉ. नवीन जोशी

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