सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के केस लडऩे वाले वकीलों में कांग्रेस नेताओं की नियुक्ति

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: DD                                                                         Views: 189

Bhopal: 6 अप्रैल 2019। प्रदेश की कांग्रेसनीत कमलनाथ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के केस लडऩे वाले वकीलों में कांग्रेस नेताओं जिनमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं, की थोकबंद नियुक्ति कर दी है। राज्य के विधि विभाग ने इन वकीलों का पैनल बनाकर सभी विभागों को जारी कर दिया है। अब सभी विभागों को इस पैनल में से ही अपने केसों के लिये वकील नियुक्त करने होंगे और उन्हें पारिश्रमिक भुगतान करना होगा। पिछली शिवराज सरकार के समय बना पैनल निरस्त कर दिया गया है।

विधि विभाग ने कुल 92 वकीलों का पैनल जारी किया है। इनमें आठ अति वरिष्ठ अधिवक्ता, 23 वरिष्ठ अधिवक्ता तथा 61 कनिष्ठ अधिवक्ता हैं। अति वरिष्ठ अधिवक्ता के पैनल में कपिल सिब्बल, पी चिदम्बरम, अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, विवेक तन्खा, सलमान खुर्शीद, अश्वनी कुमार एवं अनूप जी चौधरी शामिल हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता के पैनल में एसके दुबे, केके लाहोटी, एनके मोदी, एके श्रीवास्तव, एसके गंगेले, श्रीमती जून चौधरी, जेएस अत्री, संजय हेगड़े, सुल्तान के सिंह, रवि जायसवाल, मनीष तिवारी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, रवि मल्होत्रा, सुश्री महालक्ष्मी परानी, इम्तिआज अहमद, सौरभ मिश्रा, आदेश कुमार गिल, देवेंद्र सिंह, सुश्री प्राची मिश्रा, जितेन्द्र पहापात्रा, आरके राठौर, अशोक भान एवं दिलजीत सिंह अहलुवालिया शामिल हैं। इसी प्रकार, कनिष्ठ अधिवक्ताओं के पैनल में 61 वकील शामिल किये गये हैं।

विधि विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि अति वरिष्ठ अधिवक्ताओं को वह फीस देय होगी जो विभाग द्वारा उनकी नियुक्ति के समय तय की जाये। यह फीस प्रति पेशी लगभग पांच लाख रुपये होती है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं को प्रतिदिन 5 हजार रुपये प्रति प्रकरण तथा अधिकतम 15 हजार रुपये देय होगी जबकि प्रकरण अनुज्ञात करने के लिये प्रति प्रकरण प्रतिदिन 3 हजार रुपये एवं अधिकतम 15 हजार रुपये फीस एवं प्रारुपण के लिये 3 हजार रुपये प्रति घण्टा अथवा अधिकतम दस हजार रुपये प्रतिदिन फीस होगी। विधिक परामर्श हेतु एक हजार रुपये प्रति घण्टा अथवा 6 हजार रुपये किन्तु एक ही तथ्य से उद्भुत अनेक याचिकायें प्रस्तुत किये जाने पर फीस दस हजार रुपये से अधिक नहीं होगी।

इसी प्रकार कनिष्ठ अधिवक्ताओं को नियमित प्रकरण में पैरवी हेतु उपसंजात एवं तर्क प्रस्तुत करने के लिये ढाई हजार रुपये प्रतिदिन प्रति प्रकरण अथवा अधिकतम साढ़े सात हजार रुपये प्रतिदिन फीस देय होगा। नियमित सुनवाई के लिये प्रकरण अनुज्ञात करने के लिये पन्द्रह सौ रुपये प्रतिदिन प्रति प्रकरण अथवा 3 हजार रुपये प्रतिदिन फीस देय होगा जबकि प्रारुपण के लिये या एक ही तथ्य से उद्भुत अनेक प्रकरणों के लिये पन्द्रह सौ रुपये प्रतिदिन प्रति प्रकरण अथवा अधिकतम 3 हजार रुपये फीस देय होगी।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि विधि विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार के केसों में पैरवी करने हेतु अधिक्ताओं का नया पैनल बनाकर सभी विभागों को भेज दिया है। संबंधित विभाग ही इस पैनल में से नियुक्त किये गये अधिक्ताओं की फीस का भुगतान करेंगे।


- डॉ. नवीन जोशी

Related News

Latest Tweets