भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पहुंचा उच्चतम पर

Location: नई दिल्ली                                                 👤Posted By: Digital Desk                                                                         Views: 1406

नई दिल्ली: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) बढ़कर करीब 372 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इस भंडार को बढ़ाने में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) की बढ़ती आवक और आयात में तेज गिरावट जैसी वजहों ने बेहद अहम भूमिका निभाई है।

भारत के उलट चीन का फॉरेक्स रिजर्व घटकर पांच साल के निचले स्तर पर आ गया है। अलबत्ता यह अब भी 3,170 अरब डॉलर है, जो भारत का लगभग साढ़े आठ गुना है। रिजर्व बैंक की ओर से बीते दिन जारी रिपोर्ट के मुताबिक देश का विदेशी मुद्रा भंडार 30 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 1.22 अरब डॉलर बढ़ा है।

इसकी वजह से यह 371.99 अरब डॉलर की नई ऊंचाई छूने में कामयाब रहा। इससे पहले 23 सितंबर को समाप्त सप्ताह में यह 1.16 अरब डॉलर बढ़कर 370.76 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था। फॉरेक्स रिजर्व में सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा संपत्तियों (एफसीए) का होता है।

इसमें केंद्रीय बैंक के पास स्वर्ण भंडार और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) में भारत के विशेष आहरण अधिकार यानी एसडीआर भी शामिल होते हैं। एसडीआर मुद्राकोष की हिसाब-किताब की मुद्रा इकाई है। विदेशी मुद्रा संपत्तियों (असेट्स) में डॉलर के अलावा यूरो, पौंड और येन जैसी मुद्राओं के मूल्य में घटत या बढ़त का असर भी शुमार होता है।

रिजर्व में आए उछाल में तात्कालिक रूप से सबसे ज्यादा योगदान एफसीए का रहा, जिसमें एक हफ्ते में 1.46 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। इससे विदेशी मुद्रा संपत्तियां 345.24 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। विदेशी मुद्रा भंडार के बाकी दोनों घटकों में गिरावट दर्ज हुई।

कई हफ्तों तक स्थिर रहने के बाद रिजर्व बैंक के पास मौजूद स्वर्ण भंडार का मूल्य 23.64 करोड़ डॉलर घटकर 21.40 अरब डॉलर रह गया। इसी तरह देश के आइएमएफ में एसडीआर में 33 लाख डॉलर की कमी आई। यह 30 सितंबर को समाप्त सप्ताह में 1.48 अरब डॉलर पर रहा। मुद्राकोष के पास मौजूद रिजर्व 50 लाख डॉलर घटकर 2.38 अरब डॉलर हो गया।

पड़ोसी देश का हाल खराब

पीपल्स बैंक ऑफ चाइना की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर में चीन का विदेशी मुद्रा भंडार 19 अरब डॉलर का गोता लगाकर 3,170 अरब डॉलर रह गया। यह इसका अप्रैल, 2011 के बाद सबसे निचला स्तर है। विश्लेषकों के मुताबिक चीन के फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट से संकेत मिलता है कि पड़ोसी देश विदेशी पूंजी की निकासी के दबाव से निपटने के लिए विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल युआन को खरीदने में कर रहा है।

विदेशी निवेशक विश्व की इस दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आ रही सुस्ती के चलते अपना निवेश चीन से निकालने लगे हैं। इससे युआन पर दबाव बढ़ गया है। खास बात यह है कि रिजर्व में यह तेज गिरावट युआन के आइएमएफ की एसडीआर बास्केट में शामिल होने के कुछ दिनों बाद आई है।

बास्केट में जगह पाकर हासिल प्रतिष्ठा को चीन का केंद्रीय बैंक युआन के मू्‌ल्य को स्थिर रखकर बनाए रखना चाहता है।

अपनी मुद्रा को अन्य विदेशी करेंसियों के मुकाबले स्थिर रखने के लिए चीन ने अपने फॉरेक्स रिजर्व से पिछले माह करीब 27 अरब डॉलर खर्च कर डाले हैं।

अगर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दर में वृद्धि करता है तो आने वाले महीनों में युआन पर अवमूल्यन का दबाव और बढ़ जाएगा।

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