टेक्नालॉजी को अपनाना महंगा होता है यह एक भ्रम है: आईटी एक्सपर्ट्स

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: प्रतिवाद                                                                         Views: 280

Bhopal: 22 दिसम्बर 2016, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज की एक दिवसीय कार्यशाला में छोटे और मध्यम उद्यमियों को मिले उपयोगी टिप्स
इन्फॉर्मेशन एण्ड कम्युनिकेशन टेक्नालॉजी ने छोटे और मध्यम आकार के एंटरप्रेनर्स के लिए पूरी दुनिया के बाजारों को डेस्कटॉप पर लाकर रख दिया है। इन एंटरप्रेनर्स को नए सॉफ्टवेयर, एप्स तथा टेक्नालॉजी में एडवांस्ड मशीनरी को तेजी से अपनाना चाहिए तभी वे अपनी लागत को कम रखते हुए ज्यादा बेहतर उत्पाद बना सकेंगे और मुनाफे के साथ साथ बाजार में मुकाबले के लायक बने रह सकेंगे। यह एक भ्रम है कि टेक्नालॉजी का अपनाना महंगा होता है बल्कि इसको अपनाने से तात्कालिक और दूरगामी दोनों ही फायदे में इसमें किये गए इन्वेस्टमेंट पर कहीं भारी पड़ते हैं।

उक्त बात आज होटल लेक व्यू अशोक में पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज द्वारा आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में आईटी व कम्युनिकेशंस विशेषज्ञों ने कही। एम्पॉवरिंग एसएमईज थ्रू टेक्नालॉजी विषय पर आयोजित इस कार्यशाला को क्रिस्प, भोपाल के सीईओ मुकेश शर्मा, सिडबी के अतिरिक्त महाप्रबंधक शशांक कुमार, श्योरविन आईटी सर्विसेस के अभिषेक गुप्ता, पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स के रीजनल डायरेक्टर आर जी द्विवेदी, एमपी सीवेट के राहुल अग्रवाल सहित मध्यप्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन व अन्य संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने संबोधित किया।
आरजी द्विवेदी ने बताया कि कार्यशाला में मुख्यतः तीन बिंदुओं पर चर्चा की गई - वर्तमान में उपलब्ध टेक्नालॉजी व उसके फायदे, इस टेक्नालॉजी को खरीदने व अपनाने के लिए उपलब्ध फायनेंस विकल्प तथा उद्योग विशेष की जरूरत के मुताबिक टेक्निकली स्किल्ड मैनपॉवर को कैसे पाया जाए।

अभिषेक गुप्ता ने बताया कि भले ही सर्विस सेक्टर आईटी व कम्युनिकेशन टेक्नालॉजी के इस्तेमाल में आगे है लेकिन मैन्यूफैक्चरिंग में इसका इस्तेमाल कमाल के परिणाम ला सकता है। उन्होंने कहा कि अब किसी भी इण्डस्ट्री में मालिक ऑर्डर देने या कमाण्ड करने वाला नहीं रह गया है अब कर्मचारियों के साथ कमाण्ड की नहीं कॉलोबरेट करके काम करने का युग है। इसलिए मालिकों से लेकर कर्मचारी तक सभी को इसे अपनाने की जरूरत है।

सिडबी के शशांक कुमार ने बताया कि छोटे एंटरप्रेनर्स के सामने टेक्नालॉजी का अपनाने के लिए फण्ड्स सबसे बड़ा रोड़ा होता है जिसका समाधान उनके संस्थान ने लंबी अवधि के कम ब्याज व आसान शर्तों वाले लोन्स के माध्यम से किया है। अब एंटरप्रेनर 35 करोड़ रूपए तक के लिए टेक्नालॉजी को अपग्रेड करने व एडवांस्ड मशीनरी को खरीदने के लिए ले सकते हैं।

Related News

Latest Tweets

Latest News