कोर्टयार्ड मैरियट में दस दिवसीय राज कुजिन ऑफ इंडिया 9 फरवरी से

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: प्रतिवाद                                                                         Views: 287

Bhopal: 8 फरवरी 2017। क्या आपने केडेगेरी, झालप्रेजी, डाक बंगलो मुर्गी रोस्ट, रेलवे लैम्ब करी, नायजेला पटेटोज और दाल चुरचुरी जैसे व्यंजनों के नाम सुने हैं? यदि नही तो आप इन अनूठी और स्पाइसी डिशेज का मजा कोर्टयार्ड मैरियट के मोमो कैफे में 9 से 17 फरवरी तक चलने वाले राज कुजिन ऑफ इंडिया फूड फेस्टीवल में ले सकते हैं। शाम 7.30 से रात 11 बजे तक चलने वाले अपनी तरह के पहले फूड फेस्टीवल में भोपालवासी ऐसी अनेक डिशेज को पहली बार चख सकेंगे जो ब्रिटिश काल में बना करती थीं।

होटल के एक्जीकिटिव शेफ रविन्दर पंवार ने आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में बताया कि राज कुजिन ऑफ इंडिया ऐसे वेज व नॉनवेज भारतीय व्यंजनों का सेलीब्रेशन है जो अपने स्पाइसी स्वाद के चलते अंग्रेजों को इतने अधिक भा गये कि उन्होंने इन्हें अपने खानपान का हिस्सा बना लिया। ये व्यंजन भारतीय अवश्य थे लेकिन उन्हें हमारे खानसामों ने थोड़े से बदलाव के साथ बनाया व परोसा था। ये बदलाव कुकिंग स्टाइल और खाने में डलने वाले सामग्री में किये गए थे जैसे तेेल और घी की जगह बटर का प्रयोग, फ्राय की जगह दम कुकिंग तथा इलेक्ट्रिक की जगह चारकोल ग्रिल आदि का इस्तेमाल करना।

शेफ रविन्दर ने बताया कि फूड फेस्टीवल के दौरान परोसे जाने वाली हर डिश के पीछे एक रोचक कहानी जुड़ी हुई है। इस दौरान जिन खास डिशेज को परोसा जाएगा उनमें केडेगेरी, मल्लीगटनी सूप, झालप्रेजी, नायजेला पटेटोज, लेडी फिंगर विद पिकल्ड मैंगो, बटर जीरा पटेटो, डाक बंगलो मुर्गी रोस्ट, स्टीम चिकन, इंडियन मसाला ऑमलेट, मस्टर्ड फ्राइड फिश, रेलवे लैम्ब करी, चिंगरी समोसा, कैप्टन चिकन, मद्रास क्लब कोरमा, दाल चुरचुरी, जिंजर सोफले तथा बॉम्बे कस्टर्ड शामिल हैं।

इन व्यंजनों के नामकरण व बनने के पीछे की कहानी का एक उदाहरण देते हुए शेफ रविन्दर ने बताया कि ब्रिटिश काल में ब्रिटिश अधिकारी अपने कामकाज या शिकार के सिलसिले में डाक बंगलों या रेस्ट हाउस में ठहरा करते थे। यहां उन्हें खानसामा अक्सर बंगले में मौजूद मसालों से रोस्टेड मुर्गी बनाकर सर्व किया करते थे, यहीं से इस डिश का नाम डाक बंगलो मुर्गी रोस्ट पड़ गया।

डिनर के दौरान परोसे जाने वाले मल्लीगटनी सूप की विशेषता के बारे में शोफ रविन्दर ने बताया कि इसका नाम मिलागू यानी काली मिर्च तथा थन्नी यानी पानी से मिलकर बना है। टमाटर तथा जीरा पावडर से बनने वाला यह एक टेस्टी अपेटाइजर है जिसे हम दक्षिण भारत के लोकप्रिय रसम का भाई कह सकते हैं।

फूड फेस्टीवल के दौरान बनने वाले व्यंजनों की कुकिंग स्टाइल के बारे में चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी टीम तंदूर और चारकोल ग्रिल का इस्तेमाल पर जोर देगी क्योंकि इनसे बनने वाले खाने का स्वाद एकदम अलग होता है।

इस फूड फेस्टीवल का एक अन्य आकर्षण प्याज, टमाटर व मसाले से बनी मेन कोर्स डिश मद्रास क्लब हाउस चिकन होगी। साथ ही इस दौरान ब्रिटेन में खासे लोकप्रिय हो चुके भारतीय व्यंजन चिकन टिक्का मसाला को भी सर्व किया जाएगा।

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