मप्र सरकार को मिले पाक, बांग्लादेश व अफगानिस्तान के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के अधिकार

Location: Bhopal                                                 👤Posted By: डिजिटल डेस्क                                                                         Views: 1719

Bhopal: 13 नवंबर 2018। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने मप्र में रह रहे तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय अर्थात हिंदू, सिक्ख, बौध्द, जैन, पारसी और ईसाई के लोगों को नागरिकता देने के अधिकार राज्य सरकार को प्रदान कर दिये हैं। भोपाल एवं इंदौर जिलों के लिये कलेक्टर को जबकि अन्य जिलों के लिये राज्य के गृह सचिव को इसके लिये अधिकृत किया गया है। प्रदेश में करीब पांच सौ से अधिक लोग इन देशों के लोग लांग टर्म वीसा पर निवासरत हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता नियम 2009 के तहत उक्त देशों के अल्पसंख्यक लोगों को नागरिकता देने के लिये शर्तें भी निर्धारित की हैं। मसलन उक्त विदेशी लोगों द्वारा भारत की नागरिकता प्राप्त करने के लिये आनलाईन आवेदन करना होगा। आवेदक का सत्यापन भोपाल एवं इंदौर जिलों के लिये वहां के कलेक्टर तथा शेष जिलों के लिये राज्य के गृह सचिव किया जायेगा एवं उससे संबंधित रिपोर्ट केंद्र सरकार को एक साथ आनलाईन पोर्टल पर उपलब्ध कराई जायेगी। कलेक्टर या गृह सचिव आवेदक की उपयुक्तता के संबंध में संतुष्ट होने पर उसका रजिस्ट्रीकरण अथवा देशीयकरण द्वारा भारत की नागरिकता प्रदान करेंगे और नियमों में विहित प्रारुप में आनलाईन पोर्टल से सम्यक रुप से मुद्रित तथा हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र जारी करेंगे।

उक्त नागरिकता देने के साथ-साथ कलेक्टर एवं गृह सचिव आनलाईन/डिजिटल विवरण के अलावा भौतिक रजिस्टर भी रखेंगे जिसमें उक्त विदेशियों को ब्यौरा होगा तथा इस रजिस्टर की एक प्रति सात दिन के अंदर केंद्र सरकार को भेजना होगी।

आचार संहिता का प्रभाव :
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकता देने के लिये राज्य सरकार के दो कलेक्टरों एवं गृह सचिव को अधिकृत करने संबंधी आदेश तो जारी कर दिये परन्तु उसने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते इस आदेश का क्रियान्वयन 22 दिसम्बर,2018 से किये जानेे का उल्लेख किया है।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि पहले तीन देशों के अल्पसंख्यक समुदाय को नागरिकता देने के अधिकार केंद्र सरकार के पास थे। लेकिन अब ये अधिकार राज्य सरकार को दे दिये गये हैं। हाल ही में हुई वीडियो कान्फ्रेन्सिंग में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस संबंध में जानकारी भी राज्य के गृह विभाग को दी थी।


- डॉ. नवीन जोशी

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