
2 जून 2024। भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2023-24 में मजबूत वृद्धि दर्ज की है, जो अनुमानों को पार कर गई है। वित्तीय वर्ष मार्च के अंत में समाप्त होता है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी किए गए अस्थायी अनुमानों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर 8.2% रही, जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के 7.6% के पहले के अनुमान से अधिक है।
पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2024) में भी अर्थव्यवस्था ने 7.8% की मजबूत वृद्धि दर्ज की है, जो एनएसओ के पहले के अनुमान (5.9%) से काफी अधिक है। यह मजबूत प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निरंतर गति को दर्शाता है।
उच्च आर्थिक विकास दर के पीछे कई कारक हो सकते हैं, जिनमें मजबूत घरेलू मांग, सरकारी बुनियादी ढांचा खर्च में वृद्धि और विनिर्माण क्षेत्र में सुधार शामिल हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये अस्थायी आंकड़े हैं और आने वाले महीनों में संशोधित किए जा सकते हैं।
अर्थव्यवस्था के इस उत्साहजनक प्रदर्शन के बावजूद, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, जैसे कि वैश्विक मुद्रास्फीति, बढ़ती ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव। सरकार को इन चुनौतियों का समाधान करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए उपयुक्त नीतियां बनानी होंगी।