
16 मार्च 2025। इंटरनेट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया विकल्प जल्द ही भारत में उपलब्ध होने वाला है। एलोन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी, स्टारलिंक, भारत में अपनी सेवा लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह सेवा वायर्ड और मोबाइल कनेक्शन के साथ इंटरनेट सेवा का तीसरा प्रकार प्रदान करेगी।
🌐 कैसे काम करता है स्टारलिंक?
स्टारलिंक डेटा संचारित करने के लिए निम्न-कक्षा (लो-अर्थ ऑर्बिट) में स्थित उपग्रहों का उपयोग करता है, जिससे इंटरनेट सेवा के लिए जमीनी बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती। यह तकनीक विशेष रूप से उन क्षेत्रों में क्रांतिकारी साबित हो सकती है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध नहीं है।
🌐 दूरदराज के क्षेत्रों के लिए फायदेमंद
सैटेलाइट इंटरनेट उन ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने में सक्षम है, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवाएं नहीं पहुंच पातीं। स्टारलिंक की गति 25 एमबीपीएस से 110 एमबीपीएस तक हो सकती है, जो सामान्य उपयोग के लिए पर्याप्त मानी जाती है।
🌐 कवरेज और लागत
हालांकि यह सेवा व्यापक कवरेज प्रदान करेगी, लेकिन इसकी लागत पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं की तुलना में अधिक हो सकती है। उदाहरण के लिए, भूटान में स्टारलिंक की योजनाएं ₹3,500 से ₹4,500 मासिक तक उपलब्ध हैं। भारत में भी कीमतें इसी दायरे में हो सकती हैं।
🌐 गति और स्थिरता
स्टारलिंक इंटरनेट की अधिकतम गति 250 एमबीपीएस तक पहुंच सकती है। हालांकि, फाइबर ब्रॉडबैंड की तुलना में इसकी विलंबता (लेटेंसी) अधिक होगी, लेकिन यह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑनलाइन कार्यों के लिए उपयुक्त बनी रहेगी।
🌐 विभिन्न उपकरणों के विकल्प
स्टारलिंक उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न प्रकार के हार्डवेयर समाधान उपलब्ध कराएगा, जिनमें शामिल हैं:
फिक्स्ड डिश – घरों और कार्यालयों के लिए
मूविंग डिश – वाहनों में उपयोग के लिए
पोर्टेबल मिनी संस्करण – यात्रा के दौरान इंटरनेट एक्सेस के लिए
🌐 भारत में साझेदारी और लॉन्च योजना
स्टारलिंक ने भारत में जियो प्लेटफॉर्म्स और भारती एयरटेल के साथ साझेदारी की है। हालांकि, इस सेवा का शुभारंभ भारतीय सरकार से आवश्यक अनुमोदन मिलने के बाद ही किया जाएगा।
🌐 फाइबर इंटरनेट का पूरक
स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा, फाइबर ब्रॉडबैंड जैसी मौजूदा तकनीकों का पूरक बनेगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है, यह सेवा एक बड़ा बदलाव ला सकती है।
भारत में इस क्रांतिकारी तकनीक के आने से दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी तेज और विश्वसनीय इंटरनेट का लाभ उठा सकेंगे। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार की मंजूरी के बाद यह सेवा कितनी जल्दी आम लोगों के लिए उपलब्ध होती है।