
डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने जनहित में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निर्देश जारी किए.
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्रालय ने बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा कि आईएमपीएस और यूपीआई के माध्यम से भुगतान पर लिए जाने वाले शुल्क को उसी स्तर पर रखा जाए जितना कि एनईएफटी से 1000 रुपए से अधिक का धन हस्तांतरित करने पर लगता है.
रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार 10,000 रुपए तक के एनईएफटी हस्तांतरण पर 2.50 रुपए का शुल्क लगता है. इसके बाद 10,000 से एक लाख रुपए तक के लेनदेन पर पांच रुपए, एक से दो लाख रुपे के लिए 15 रुपए और दो लाख रुपए से ज्यादा पर 25 रुपए का सेवा शुल्क लिया जाता है.
इसके अलावा अनस्ट्रक्र्चड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा (यूएसएसडी) के माध्यम से 1,000 रुपए से ज्यादा का धन भेजने पर मंत्रालय ने कहा है कि इन दरों में 50 पैसे की और छूट दी गई है. यूएसएसडी के माध्यम से फीचर फोनों पर बैंकिंग लेनदेन किए जाते हैं. यह लघु संदेश सेवा होती है.
यूएसएसडी के माध्यम से लेनदेन पर डेढ़ रुपए का शुल्क लगता है जिसे 30 दिसम्बर तक के लिए हटा लिया गया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने जनहित में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से यह बात कही है. यह निर्देश 31 मार्च 2017 तक सभी लेनदेन पर लागू होंगे.