
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम में पदोन्न्ति घोटाले के आरोप वाली याचिका को गंभीरता से लिया गया। इसी के साथ विभागीय पदोन्न्ति समिति (डीपीसी) सहित अन्य तमाम दस्तावेज तलब कर लिए गए। इसके लिए 27 सितम्बर तक का समय दिया गया है।
न्यायमूर्ति संजय सेठ की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता राजधानी भोपाल निवासी एसके जैन की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम भोपाल में सीनियर एकाउंटेंट बतौर पदस्थ है। वरिष्ठता के मुताबिक महाप्रबंधक के पद पर प्रमोशन होना था। डीपीसी प्रक्रिया में याचिकाकर्ता का नाम वरिष्ठता सूची में दूसरे नंबर पर दर्ज था। जबकि सुहैल कादरी का नाम आठवें नंबर पर था।
इसके बावजूद सुहैल कादरी को महाप्रबंधक के रूप में पदोन्न्त कर दिया गया। जब दूसरे नंबर पर आने के बावजूद महाप्रबंधक बनने का सौभाग्य नहीं मिला, तो जाहिरतौर पर पदोन्न्ति घोटाले की बू आई। लिहाजा, पहले चरण में विभागीय स्तर पर विरोध दर्ज कराया गया। जब कोई नतीजा नहीं निकला तो हाईकोर्ट की शरण ले ली गई।
डीपीसी के मुताबिक कुल 6 पदों पर पदोन्न्ति होनी थी। इसका सीधा अर्थ है कि आठवें नंबर तक पदोन्न्ति संभव ही नहीं थी। इसके बावजूद याचिकाकर्ता सहित अन्य दावेदारों का हक मारा गया। नेपथ्य में बड़ी संगाबित्ती से इंकार न होने के कारण जांच आवश्यक है।