
सुप्रीम कोर्ट से मध्यप्रदेश के तमाम निजी मेडिकल कॉलेजों को करारा झटका लगा है. राज्य सरकार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने निजी मेडिकल कॉलेजों में चल रहे दाखिलों पर रोक लगा दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ अदालत की अवमानना का नोटिस भी जारी किया है और 19 सितंबर तक उनका जवाब मांगा है.
सुप्रीम कोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालकों से पूछा है कि आखिर कॉलेजों में काउंसलिंग से प्रवेश देने में सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का पालन क्यों नहीं किया जा रहा और ऐसे में क्यों ना उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई की जाए.
दरअसल राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों के लिए की जा रही काउंसलिंग को चुनौती दी है.
याचिका में कहा गया है कि नीट के जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों की व्यवस्था देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि निजी मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग और सीटों के आवंटन पर राज्य सरकार का अधिकार रहेगा. लेकिन निजी मेडिकल कॉलेज सुप्रीम कोर्ट के आदेश की परवाह ना करते हुए अपने स्तर पर काउंसलिंग करवा रहे हैं, जिसमें राज्य सरकार की काउंसलिंग में शामिल छात्रों को कॉलेजों में दाखिला नहीं दिया जा राह है.
निजी मेडिकल कॉलेजों के इस कदम को अदालत की नाफरमानी बताते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली थी. अब सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ निजी मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है बल्कि उनमें हो रहे दाखिलों पर अपने अगले आदेश तक रोक भी लगा दी है.