भू-अर्जन वाली भूमि का अब बनेगा लैण्ड बैंक

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Place: Bhopal                                                👤By: Digital Desk                                                                Views: 18065

06 नवम्बर 2016, केंन्द्र सरकार के नये भू-अर्जन कानून जिसे भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनव्र्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार कानून 2013 कहा जाता है, के तहत अर्जित भूमि का अब लैण्ड बैंक बनेगा। दरअसल इस कानून के क्रियान्वयन हेतु मप्र सरकार ने गत 4 दिसम्बर 2015 को नियम तो बना दिये थे परन्तु अर्जित की जाने वाली भूमि के उपयोग के बारे में प्रावधान नहीं किया था। अब एक साल बाद इसका भी प्रावधान कर दिया गया है।



ताजा प्रावधान के तहत उक्त कानून के तहत जिस परियोजना के लिये भूमि अर्जित की गई है यदि वह पांच वर्ष तक परियोजना हेतु उपयोग में नहीं लाई जाती है तो जिला कलेक्टर सुनवाई के बाद उस भूमि को उनके मूल स्वामियों को वापस कर देगा। लेकिन मूल भू-स्वामियों को यह भूमि तभी मिलेगी जबकि वे भू-अर्जन की कार्यवाही के दौरान उन्हें मिले अवार्ड की राशि लौटा देते हैं। अवार्ड की यह राशि लौटाने का उन्हें छह से एक वर्ष तक का समय दिया जायेगा और यदि इस समयावधि में अवार्ड की राशि नहीं लौटाई जाती है तो ऐसी अर्जित भूमि को भविष्य की परियोजनाओं के लिये लैण्ड बैंक में रख दिया जायेगा।



ताजा प्रावधान के तहत जिस निकाय को उसकी परियोजना के लिये भूमि अर्जित कर सौंपी गई है वह यदि ऐसी भूमि लैंड बैंक में जमा किये जाने के लिये भूमि जिला कलेक्टर को नहीं सौंपता है तो जिला कलेक्टर पुलिस बल की सहायता लेकर ऐसी भूमि का कब्जा ले सकेगा।



- डॉ नवीन जोशी

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