जब आप झूठ बोलते हैं, तो आपकी नाक का तापमान बढ़ जाता है: पिनोचियो प्रभाव

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 1471

19 मार्च 2025। क्या आपने कभी यह सुना है कि झूठ बोलने पर आपकी नाक बढ़ जाती है? यह तो सिर्फ एक कल्पना थी, जिसे मशहूर कार्टून कैरेक्टर पिनोचियो की कहानी से जोड़ा गया था। लेकिन वैज्ञानिक शोध में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है—झूठ बोलने पर आपकी नाक का तापमान बढ़ जाता है। इसे "पिनोचियो प्रभाव" (Pinocchio Effect) कहा जाता है।

👃 क्या है पिनोचियो प्रभाव?
"पिनोचियो प्रभाव" एक मनोवैज्ञानिक और जैविक प्रतिक्रिया है, जिसमें जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तो उसके चेहरे, खासकर नाक और आंखों के आस-पास का तापमान बढ़ जाता है। यह परिवर्तन थर्मोग्राफी कैमरों के माध्यम से देखा जा सकता है।

👃 कैसे होता है तापमान में बदलाव?
स्पेन के ग्रेनाडा विश्वविद्यालय (University of Granada) में किए गए शोध के अनुसार, जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है, तो उसके शरीर में तनाव और चिंता बढ़ जाती है। यह तनाव ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करता है, जिससे रक्त प्रवाह तेज हो जाता है और शरीर का तापमान कुछ क्षेत्रों में बढ़ जाता है।
विशेष रूप से, नाक और उसके आसपास की त्वचा का तापमान बढ़ने लगता है, जिसे इंफ्रारेड थर्मोग्राफी (Infrared Thermography) तकनीक से मापा जा सकता है।

✔️ शोध क्या कहता है?
ग्रेनाडा विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट एमिलियो गोमेज़ मिलान और उनकी टीम ने इस प्रभाव की खोज की। उन्होंने पाया कि झूठ बोलते
समय: नाक का तापमान औसतन 1.2°C तक बढ़ जाता है।
तनाव और झूठ बोलने के कारण मस्तिष्क के इंसुला (Insula) क्षेत्र में एक्टिविटी बढ़ जाती है, जो भावनाओं और शरीर की संवेदनाओं को नियंत्रित करता है।
सच बोलने वाले लोगों की तुलना में झूठ बोलने वालों के चेहरे के तापमान में अधिक बदलाव देखा जाता है।

✔️ क्या इससे झूठ पकड़ना संभव है?
हालांकि पॉलीग्राफ टेस्ट (Lie Detector) झूठ पकड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उसमें कई खामियां हैं। वहीं, थर्मोग्राफी आधारित परीक्षण अधिक प्रभावी हो सकता है, क्योंकि इसमें शरीर की स्वचालित प्रतिक्रियाओं को रिकॉर्ड किया जाता है। कुछ सुरक्षा एजेंसियां और अपराध अनुसंधान विभाग इस तकनीक पर अध्ययन कर रहे हैं, जिससे भविष्य में यह झूठ पकड़ने का एक वैज्ञानिक तरीका बन सकता है।

👃 क्या हर झूठ पर तापमान बढ़ता है?
हर स्थिति में ऐसा नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति झूठ बोलने में बहुत अनुभवी हो या मानसिक रूप से तैयार हो, तो यह प्रभाव कम हो सकता है। लेकिन भावनात्मक और नैतिक दबाव में झूठ बोलने पर शरीर का स्वाभाविक जैविक प्रतिक्रिया तंत्र इसे रोक नहीं सकता।

"पिनोचियो प्रभाव" यह साबित करता है कि शरीर झूठ बोलने पर प्रतिक्रिया देता है, और हमारी नाक सच छिपाने के बावजूद कुछ ना कुछ 'बोल' ही देती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन और साइकोलॉजी रिसर्च के लिए मददगार साबित हो सकती है। तो अगली बार जब कोई कहे कि आपकी नाक लाल हो रही है, तो सोचिए... कहीं आपने झूठ तो नहीं बोला? 😃

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