केबल से लेजर की ओर: अल्फाबेट की नई तकनीक स्टारलिंक को देगी चुनौती

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Place: भोपाल                                                👤By: prativad                                                                Views: 1070

21 मार्च 2025। इंटरनेट का भविष्य हवा में आकार ले रहा है! गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने पारंपरिक केबल नेटवर्क को पीछे छोड़ते हुए लेजर तकनीक पर दांव लगाया है। इसकी नई पहल, तारा, एलन मस्क के स्टारलिंक के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है।

✔ तारा: इंटरनेट क्रांति की नई लहर
अल्फाबेट ने घोषणा की है कि उसकी स्वामित्व वाली कंपनी तारा अब एक स्वतंत्र उद्यम के रूप में कार्य करेगी। इसका प्रमुख उत्पाद तारा लाइटब्रिज, एक वायरलेस संचार प्रणाली है जो अदृश्य लेजर बीम के माध्यम से डेटा ट्रांसमिट करता है।

फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क की तुलना में, जिसे स्थापित करने में वर्षों लग सकते हैं और भारी निवेश की जरूरत होती है, तारा की लेजर तकनीक कुछ ही घंटों में इंस्टॉल की जा सकती है। यह विशेष रूप से उन ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए फायदेमंद होगा जहां फाइबर नेटवर्क बिछाना संभव नहीं है।

✔ कैसे काम करता है तारा?
यह 12 मील (लगभग 19 किमी) तक डेटा ट्रांसमिट कर सकता है।
नोड-टू-नोड सिस्टम पर काम करता है, जिससे परंपरागत इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की निर्भरता कम हो जाती है।
5G की बढ़ती मांग के बीच, यह तकनीक शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के बीच डिजिटल अंतर को कम कर सकती है।
तारा की लेजर तकनीक 2026 तक व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हो सकती है।

✔ गुब्बारों से लेजर तक: प्रोजेक्ट लून की विरासत
यह तकनीक अल्फाबेट के प्रोजेक्ट लून से विकसित हुई है, जो हवाई गुब्बारों के माध्यम से इंटरनेट पहुंचाने का एक प्रयास था। लेकिन पर्यावरणीय प्रभाव और परिचालन चुनौतियों के कारण 2021 में लून प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया। अब वही लेजर तकनीक बिना मौसम की बाधाओं के एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है।

✔ लेजर बनाम फाइबर: कौन रहेगा आगे?
20 Gbps की गति के साथ, यह तकनीक फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क को टक्कर देती है और कई मामलों में इसे पार भी कर सकती है।
शहरी क्षेत्रों में तेजी से विस्तार संभव, खासकर स्मार्ट शहरों जैसे सिंगापुर और हेलसिंकी में, जहां टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है।
प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अधिक लचीला, क्योंकि इसका कोई फिजिकल केबल नेटवर्क नहीं है।

✔ भविष्य की झलक: क्या तारा इंटरनेट की दुनिया बदल देगा?
अगर यह तकनीक सफल होती है, तो यह इंटरनेट कनेक्टिविटी का पूरा परिदृश्य बदल सकती है। फाइबर नेटवर्क के विकल्प के रूप में, यह तेज, लचीला और किफायती समाधान प्रदान करेगा, जिससे दुनिया के दूरदराज के क्षेत्रों तक भी हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंच सकेगा।

क्या तारा वाकई स्टारलिंक को मात दे पाएगा? आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा!

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