
4 अप्रैल 2025। अमेरिकी सरकार ने चीन में अपने राजनयिक कर्मियों, उनके परिवारों और सुरक्षा मंजूरी प्राप्त ठेकेदारों पर चीनी नागरिकों के साथ किसी भी प्रकार के "रोमांटिक या यौन संबंध" बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। समाचार एजेंसी एपी ने इस मामले से अवगत चार सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह नीति जनवरी में अमेरिकी राजदूत निकोलस बर्न्स द्वारा लागू की गई थी, जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पद छोड़ने से कुछ दिन पहले प्रभावी हुई। यह पिछले साल शुरू की गई एक नीति का विस्तार है, जिसमें अमेरिकी दूतावास और पांच वाणिज्य दूतावासों के कर्मियों को चीनी गार्ड और अन्य सहायक स्टाफ के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने से रोका गया था।
एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्पष्ट नहीं है कि नीति में "रोमांटिक और यौन संबंध" को किस तरह परिभाषित किया गया है। हालांकि, नए नियमों ने इस प्रतिबंध को और कठोर बना दिया है, जिससे यह शीत युद्ध काल जैसी "गैर-भाईचारा" नीति का रूप ले चुका है।
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों को इस बदलाव की जानकारी मौखिक रूप से और ईमेल के जरिए दी गई, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया। केवल उन अमेरिकी कर्मियों को छूट दी गई है, जो पहले से चीनी नागरिकों के साथ संबंधों में थे, लेकिन उनकी व्यक्तिगत समीक्षा की गई। अगर किसी को छूट नहीं मिलती, तो उन्हें अपना संबंध समाप्त करना होगा। नियम का उल्लंघन करने वालों को तुरंत चीन छोड़ने और स्वदेश लौटने का आदेश दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पश्चिमी खुफिया एजेंसियां, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटेन, लंबे समय से राजनयिक कर्मियों को चीनी नागरिकों के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने के खिलाफ चेतावनी देती रही हैं। वे बीजिंग पर "हनी ट्रैप" जासूसी अभियान चलाने का आरोप लगाती हैं, जिसमें कथित तौर पर आकर्षक महिलाओं के जरिए विदेशी नागरिकों को फंसाया जाता है और बाद में उन पर बीजिंग के लिए काम करने का दबाव बनाया जाता है।
हालांकि, इन आरोपों का अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है। चीन ने इन दावों को बार-बार खारिज किया है और पश्चिमी खुफिया एजेंसियों पर "अपने ही षड्यंत्रों को चीन पर थोपने" का आरोप लगाया है।