
वर्ल्ड हायपरटेंशन डे ( 17 मई 2017)
16 मई 2017, डैश यानि डायटेरी एप्रोच टू स्टॉप हायपरटेंशन जिसमें कम सोडियम और ज्यादा न्यूट्रीशन वाली डाइट के जरिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखा जाता है, को अपनाकर सायलेंट किलर माने जाने वाले हायपरटेंशन से बचा जा सकता है। पहले बड़ी उम्र के लोगों में ज्यादा पाया जाने वाला हायपरटेंशन अब तेजी से युवाओं को अपना शिकार बना रहा है। नौकरी और कारोबार के तनाव, जंक फूड, अल्कोहल और एक्सरसाइज के लिए टाइम न निकाल पाने की वजह से बीते एक वर्ष में युवाओं में हायपरटेंशन के मामलों में 50 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। एक मोटे अनुमान के मुताबिक प्रत्येक तीन में से एक व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में है किंतु ज्यादातर लोगों को इसका पता बहुत देर से लगता है।
उक्त बात वर्ल्ड हायपरटेंशन दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में शहर के जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ एवं अक्षय हार्ट एण्ड मल्टी स्पेश्यिालिटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. दीपक चतुर्वेदी ने कही। उन्होंने कहा कि कम उम्र में हायपरटेंशन होने का दुष्परिणाम 45 से 50 वर्ष की अवस्था में शरीर के बड़े व महत्वपूर्ण ऑर्गन्स में डैमेज के रूप में सामने आता है जिससे व्यक्ति अपने जीवन के श्रेष्ठतम समय में ज्यादा काम करने का लायक नहीं बचता। लोगों में हायपरटेंशन बढ़ने के कारणों पर चर्चा करते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि समय-समय पर जांच न कराना, बिना डॉक्टर की सलाह दवाएं लेना या फिर कॉम्बीनेशन ड्रग्स की बजाए सिंगल ड्रग का लगातार सेवन करते रहना, स्लीप एप्निया से ग्रस्त होना तथा कतिपय चिकित्सकों द्वारा बैन की जा चुकी नुकसानदेह दवाओं का लिखा जाना इस रोग को बढ़ावा देते हैं। एटिनोलॉल तथा हायड्राक्लोरोथायजाइड दो ऐसी दवाएं हैं जिनके अनेक साइड इफेक्ट हैं, इनसे बचा जाना चाहिए।
भोपाल में युवा वर्ग में दो गुना हायपरटेंशन के केस देखनें को मिल रहें हैं वही पत्रकार और पुलिस कर्मी भी जायदा हायपरटेंशन के शिकार हो रहें हैं, पुलिस विभाग में काम करने वाले लोगों और पत्रकारों के अनियमित दिनचर्या और खान पान, देर रात तक काम और सही समय से पूरी नींद न लेना हायपरटेंशन की प्रमुख वजह हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वर्ष को नो योर नंबर्स थीम पर मनाया जा रहा है जिसके तहत दुनियाभर में सही ब्लड प्रेशर को बनाये रखने संबंधी जागरूकता फैलाने का कार्य किया जाएगा। हाल ही में हुए कुछ मेगा ट्रायल्स में यह बात सामने आई है कि यदि सिस्टोलिक 140 ब्लड प्रेशर को घटाकर 120 पर ले आया जाए तो 43 प्रतिशत मरीजों को स्ट्रोक और हार्ट फैल्योर से बचाया जा सकता है। लेकिन यह देखा गया है कि लगभग 70 प्रतिशत मरीज अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित नहीं कर पाते।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज, किडनी तथा अस्थमा पेशेंट्स के हायपरटेंशन का इलाज बहुत मुश्किल भरा होता है जिसमें मरीज और डॉक्टर दोनों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
हायपरटेंशन से बचने के उपायों के बारे में डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि नमक का ज्यादा इस्तेमाल, शराब पीना, स्मोकिंग करना एवं अत्यधिक तनाव हायपरटेंशन को बुलावा देते हैं। जबकि नियमित व्यायाम, ध्यान, योग, फलों व फायबरयुक्त आहार तथा थोड़ा मनोरंजन इससे बचने के उपाय हैं। जो लोग इस रोग की चपेट में आ चुके हैं उन्हें न सिर्फ अपनी दिनचर्या व खानपान पर ध्यान देना चाहिए बल्कि चिकित्सकीय परामर्श व दवाओं का नियमित सेवन अवश्य करना चाहिए।
क्या होता है हायपरटेंशन ?
जब किसी व्यक्ति का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 एमएमएचजी या इससे ऊपर और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 एमएमएचजी या इससे ऊपर हो जाता है, तब उसे उच्च रक्तचाप या हायपरटेंशन कहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का रक्तचाप प्रतिदिन और प्रति घंटे बदलता रहता है।
क्या होती है डैश डाइट?
हायपरटेंशन से बचने के लिए तैयार की गई डैश डाइट में कम नमक किंतु उच्च विटामिन व मिनरल वाले खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।
इन पदार्थों में ताजे व रेशेदार फल व सब्जियां, कम फैट वाले डेयरी उत्पाद, मछली व पोल्ट्री उत्पाद, ड्राय फ्रूट्स आदि शामिल होते हैं।