नदी की रेत की कमी को पूरा करेगी स्टोन क्रशर इण्डस्ट्री

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Place: Bhopal                                                👤By: DD                                                                Views: 18317

नदी सैण्ड से दोगुना बेहतर व रॉयल्टी मुक्त होने से स्टोन सैण्ड मिलेगी आधे दामों पर,

बचेगा पर्यावरण तथा मिलेगा 5 लाख स्थानीय लोगों को रोजगार

इण्डस्ट्री को स्टोन सैण्ड रॉयल्टी फ्री होने की घोषणा के आदेश की कॉपी मिलने का इंतजार



3 जून 2017, पूरे प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा नदियों से रेत के उत्खनन पर लगाई गई रोक से उत्पन्न रेत की कमी को प्रदेश के सभी भागों में स्थित लगभग 8 हजार स्टोन क्रशर प्लांट पत्थर से रेत बनाकर पूरा करेंगे। मुम्बई सहित देश के अनेक शहरों में प्रयुक्त हो रही स्टोन सैण्ड पर्यावरण मित्र व सस्ती होने के साथ साथ मजबूती के मामले में दोगुना से ज्यादा बेहतर होती है। इसके लिए प्रदेश के मौजूदा स्टोन क्रशर प्लांटों को 15 लाख रूपये से लेकर 1 करोड़ रूपए तक प्रति प्लांट के हिसाब से अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी जिसके लिए प्रदेश सरकार से 50 प्रतिशत सब्सिडी की दरकार है।



उक्त बात आज मध्यप्रदेश स्टोन क्रशर इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेन्दरपाल सिंह चावला ने एक पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी को जीवित व्यक्ति का दर्जा देने तथा इस नदी से रेत उत्खनन पर रोक लगाने की राज्य सरकार की पहल का वे स्वागत करते हैं। ऐसी ही रोक वर्ष 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी लगाई गई थी जिसके तहत नदी व नालों। इस रोक पर अमल की शुरूआत से नदियों के जलीय पर्यावरण को सुधारने में निश्चित ही मदद मिलेगी।



श्री चावला ने आगे कहा कि मौजूदा स्टोन प्लांटों ने मौजूदा संसाधनों के साथ स्टोन सैण्ड बनाने का कार्य फिलहाल आरंभ कर दिया है किंतु उत्पादन को गति देने के लिए उन्हें नई मशीनों व उपकरणों की जरूरत है जिस पर 15 लाख से लेकर 1 करोड़ रूपये प्रति प्लांट तक का खर्च आएगा। हम चाहते हैं कि इस मशीनरी की खरीद पर प्रदेश सरकार 50 प्रतिशत की सब्सिडी मुहैया कराये ताकि कमजोर आर्थिक स्थिति से गुजर रही स्टोन क्रशर इण्डस्ट्री आगे बढ़ने लायक बन सके।



इस अवसर पर श्री चावला ने फ्लाई एश से ईंटों के निर्माण पर 28 फीसदी टैक्स लगाने को अनुचित बताते हुए कहा कि ऐसा होने से पर्यावरण फ्रेंडली फ्लाई एश ईंटें महंगी हो जाएंगी और प्रदूषण फैलाने वाले ईंट भट््टों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने प्रदेश से लेकर केन्द्र सरकार तक का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है तथा उन्हें उम्मीद है कि पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए 28 फीसदी टैक्स को वापस लिया जायेगा।

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