आरडी मेमोरियल में आरंभ हुआ प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद एवं योग सम्मेलन निरामय

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Place: Bhopal                                                👤By: DD                                                                Views: 18836

17 नवंबर, 2017। बरखेड़ी कलां, भदभदा रोड स्थित आरडी मेमोरियल आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल में आज से प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद एवं योग सम्मेलन निरामय आरंभ हुआ। साइकोसोमेटिक बीमारियों पर केन्द्रित इस दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ प्रदेश के राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने किया। इस मौके पर उन्होंने एक स्मारिका का विमोचन भी किया। आयोजन समिति के प्रमुख हेमंत सिंह चौहान इस अवसर पर मौजूद थे। सम्मेलन के पहले दिन डॉ. पीके प्रजापति, डॉ. माधव सिंह बघेल, डॉ. नितिन अग्रवाल तथा डॉ. ओलेग सोरोकिन के व्याख्यान हुए। इन अतिथि विद्वानों ने आयुर्वेद की विशेषताएं, साइकोलॉजिकल काउंसलिंग, हर्बल ट्रीटमेंट और और अनेक बीमारियों के क्षेत्र में हुए शोधों पर चर्चा की गई।



सोशल मीडिया की लत से रुक रहा मानसिक विकास

कार्यक्रम में डॉ. पीके प्रजापति ने सोशल मीडिया की लत को छुड़़वाने में आयुर्वेद की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की लत इसलिए घातक है क्योंकि ये हमारे मानसिक विकास को रोक देता है। इसके अधिक इस्तेमाल के बाद स्टूडेंट्स किताबों के ज्ञान का उल्लेख नहीं करते। वे भले ही इंटरनेट का इस्तेमाल नए नए आविष्कारों का पता करने के लिए करते हैं पर इससे धीरे धीरे उन्हें इसकी बुरी लत लग जाती है और उनका मानसिक विकास रुक जाता है। वहीं आज के दौर की अनियमित जीवनशैली भी उन्हें कई तरह के रोगों की तरफ धकेल देती है जिससे वे इनसोमेनिया और कंप्यूटर विजनरी सिंड्रोम जैसी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ये सभी बीमारियां नियमित योग से ठीक हो सकती हैं।



महाभारत के दौर से चली आ रही चिंता

वहीं कार्यक्रम में दूसरे वक्ता डॉ. माधव सिंह बघेल ने कहा कि आज के दौर में युवाओं के भीतर चिंता और न्यूरोसिस विकार अधिक मात्रा में पाया जाता है। इस दौर में जहां सभी अनियमित जीवनशैली जी रहे हैं ऐसे में यह युवाओं की लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बनता जा रहा है। डॉ. बघेल ने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि महाभारत के काल से चली आ रही इस बीमारी को आयुर्वेद की मदद से किस तरह ठीक किया जा सकता है। चिंता को सिर्फ साइकोलॉजिकल काउंसलिंग के जरिए ही दूर किया जा सकता है।



आयुर्वेदिक की गुणवत्ता के साथ हुआ समझौता

इस मौके पर विश्व आयुर्वेद परिषद के नेशनल सेक्रेटरी डॉ. नितिन अग्रवाल ने आयुर्वेद उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि डॉक्टर द्वारा दी जा रही किसी भी दवाई में गुणवत्ता होना बेहद जरूरी है। रोगियों को अप्रभावी दवा पेश करना मेरे हिसाब से पेशे के खिलाफ होगा। मेरे अनुसार आयुर्वेद इसलिए पिछड़ गया क्योंकि हमने आयुर्वेदिक दवाईयों की गुणवत्ता के साथ समझौता कर दिया और फिर दवा ने अपेक्षित परिणाम नहीं दिए।



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15 साल पहले किया आविष्कार

कार्यक्रम के अंत में रशिया से आए डॉ. ओलेग सोरोकिन ने आयुर्वेदिक चिकित्सा का विकास मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने 15 साल पहले किए गए अपने आविष्कार एनालॉग फॉर पल्स रीडिंग के बारे में बताया जिसें उन्होंने पश्चिमी डॉक्टरों को साबित करने के लिए बनाया था। जैसा कि पश्चिमी डॉक्टर तथ्यों और आंकड़ों पर काम करते हैं, उन्हें सुरक्षा के आधार पर और किसी भी तथ्य को स्वीकार करने की आवश्यकता होती है। डॉ. ओलेग आयुर्वेदिक शर्तों और पश्चिमी शरीर विज्ञान की शर्तों के बीच संबंधों को भी ढूंढ रहे हैं, ताकि पश्चिमी चिकित्सक इसे आसानी से समझ सकें।



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सम्मेलन में शनिवार को दूसरे दिन अन्य वक्ताओ के व्याख्यानों के साथ साथ अपनी तरह के अनूठे आयुर्वेद फूड फेस्ट का आयोजन किया जायेगा। जिसमें प्रतियोगी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और औषधियों से स्वास्थ्यवर्द्धक डिशेज तैयार करेंगे। इनमें से दो श्रेष्ठ डिशेज को भी पुरस्कृत किया जायेगा। सम्मेलन का एक अन्य आकर्षण पोस्टर प्रजेंटेशन होगा जिसमें 40 विद्यार्थियों के पोस्टर प्लाज्मा टेलीविजन के जरिये प्रदर्शित किये जायेंगे।



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