
अब तक लंबित हैं 2610 शिकायतकर्ताओं के आवेदन
22 अक्टूबर 2016, मुगालिया छाप की सुशीला बाई ने जमीन का रिकार्ड दुरूस्त कराने के लिए 23 अगस्त 2016 को कलेक्टर जनसुनवाई में आवेदन लगाया था। सुशीला बाई के आवेदन को जांच के लिए तहसीलदार हुजूर भेजा गया। 7 सितंबर तक उसका निराकरण होना था, प्रकरण अभी भी लंबित हैं। यह स्थिति केवल सुशीला बाई की नहीं है, बल्कि 2610 शिकायतकर्ताओं के आवेदनों का अब तक निराकरण नहीं हो सका है। अधिकारी लगातार प्रकरणों के निराकरण करने में लापरवाही बरत रहे हैं। यही वजह है कि विभागों में भी जनसुनवाई के आवेदनों की पेंडेंसी लगातार बढ़ती जार रही है।
लगातार बढ़ रही है डिफाल्टर आवेदनों की संख्या
2610 लंबित आवेदनों में से डिफाल्टर आवेदनों की संख्या 2508 पहुंच गई है। इन प्रकरणों का निराकरण अधिकारी करने से बच रहे हैं, जबकि इन आवेदनों के निराकरण भी हो सकते हैं। इसमें से कुछ आवेदन तो वर्ष 2014-2015 के भी लंबित हैं। सबसे ज्यादा पेंडेंसी 2015 की है। नार्मल आवेदनों को भी निराकृत करने में अधिकारी रूचि नहीं ले रहे हैं। पहले जहां नार्मल आवेदनों की पेंडेंसी 100 से कम रहती थी, अब यह आंकड़ा उससे अधिक बढ़ता ही जा रहा है।
यह है विभागों में जनसुनवाई आवेदनों की पेंडेंसी की स्थिति
पुलिस अधीक्षक कार्यालय -310
नगर निगम - 121
टीटी नगर एसडीएम -175
हुजूर तहसीलदार -187
जिला शिक्षा अधिकारी - 174
एसडीएम हुजूर - 54
श्रम आयुक्त कार्यालय -103
गोविंदपुरा एसडीएम -81
आदिम जाति कल्याण विभाग - 88
सीएमएचओ - 80