
1 दिसंबर 2016, भारत सरकार ने भूमि के ऊपर मोबाईल टावर लगाने एवं भूमि के अंदर आप्टिकल फाईबर लाईन डालने के नये नियम प्रभावशील कर दिये हैं। इसके लिये दूरसंचार मंत्रालय में भारतीय तार अधिनियम 1885 के तहत भारतीय तार मार्ग के अधिकार नियम 2016 बनाये हैं।
इन नियमों के तहत केंद्र एवं राज्य सरकार ऐसे समुचित प्राधिकारी नियुक्त करेगी जिनके नियंत्रण में ये तार अवसंरचना स्थापित की जायेगी। भूमिगत तार डालने के लिये आवेदन-पत्र के साथ एक हजार रुपये प्रति किलोमीटर तक फीस वसूल की जा सकेगी जोकि प्रशासनिक व्यय की पूर्ति हेतु होगी। इसी प्रकार भूमि के ऊपर मोबाईल टावर संरचना हेतु एक बारगी की फीस एक हजार तक होगी।
नये नियमों में समुचित प्राधिकारी को अधिकार दिया गया है कि वह किसी मोबाईल टावर अथवा भूमिगत आप्टिकल फाईबर लाईन को हटाने या परिावर्तित करने का नोटिस जारी कर सकेगा। ऐसा नोटिस मिलने के बाद लायसेंसधारी को तीस दिनों के अंदर मोबाईल टावर या भूमिगत तार लाईन को हटाने या परिवर्तित करने की विस्तृत योजना समुचित प्राधिकारी को पेश करेगा। इसके बाद उसे नब्बे दिन का समय मोबाईल टावर या भूमिगत तार लाईन को हटाने या परिवर्तित करने का समय दिया जायेगा। हटाने या परिवर्तित करने की लागत लायसेंसधारी को ही वहन करना होगी।
डायरेक्टर टेलीकाम एमपी पंकज पोरवाल के अनुसार, अब तक केंद्र सरकार के मोबाईल टावर लगाने एवं भूमिगत आप्टिकल फाईबर तार लगाने के संबंध में कोई नियम नहीं थे जो अब बनकर प्रभावशील हो गये हैं।
- डॉ नवीन जोशी