
22 जनवरी 2017, देश-प्रदेश में कुत्तों के पिल्लों को माइक्रो चिप लगाकर ही बेचा जा सकेगा। इसके लिये इन पिल्लों के विक्रय की शाप बन सकेगी। पिल्लों का प्रजजन करने वाले एवं डाग शाप खोलने के लिये राज्य पशु कल्याण बोर्ड से लायसेंस लेना होगा। लायसेंस की अवधि दो वर्ष तक रहेगी तथा इसके बाद पांच हजार रुपये शुल्क देकर लायसेंस का नवीनीकरण कराया जा सकेगा।
केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने पहली बार इस संबंध में नियम जारी किये हैं। आगामी 11 फरवरी के बाद ये नियम देशभर में प्रभावशील हो जायेंगे। नियमों में कहा गया है कि आठ सप्ताह से कम उम्र के पिल्ले ऐसी डाग शाप से विक्रय नहीं किये जा सकेंगे तथा छह माह से अधिक आयु के पिल्ले उचित टीकाकरण के द्वारा उन्हें विसंक्रमित किये नहीं बेचा जा सकेगा। इसके अलावा तुरन्त विक्रय के लिये पिल्लों का सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन नहीं किया जायेगा। डाग शाप से विक्रय किये जाने पर ग्राहक को रसीद दी जायेगी। श्वान प्रजनक के लिये अनिवार्य होगा कि वह लायसेंसधारी डाग शाप को ही अपने पिल्ले बेचे। प्रजनक और डाग शाप संचालक को कुत्तों एवं उसके पिल्लों के लिये स्वास्थ्यवर्धक सुविधायें रखनी होगी। एक ही गौत्र वाले श्वानों का प्रजनन हेतु संसर्ग नहीं कराया जा सकेगा तथा मादा श्वान से आठ वर्ष की आयु के उपरान्त संसर्ग नहीं कराया जायेगा।
मप्र के पशुपालन संचालक डा. आरके रोकड़े का इस बारे में कहना है कि अभी तक श्वान के पिल्लों के विक्रय के नियम नहीं थे तथा खुलेआम इनका विक्रय होता है। केंद्र द्वारा नियम बनाने से इनके स्वास्थ्य की देखरेख एवं उनकी जातियों व संख्या का भी पता चल सकेगा। इन नियमों का हम भी अध्ययन कर रहे हैं।
- डॉ नवीन जोशी