
17 फरवरी 2017। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत सरकारी डाक्टरों पर प्रायवेट प्रैक्टिस करने पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस संबंध में राज्य शासन ने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों तथा समस्त सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षकों को निर्देश जारी कर दिये हैं।
निर्देशों में कहा गया है कि प्रायवेट प्रैकिटस पर प्रतिबंध के विरुध्द कुछ शासकीय चिकित्सकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें न्यायालय ने आगामी आदेश तक निजी प्रैक्टिस करने वाले याचिकाकत्र्ता एवं ऐसे अन्य चिकित्सकों के विरुध्द आगामी आदेश तक कोई दण्डात्मक कार्यवाही न करने के आदेश जारी किये हैं। इससे साफ है कि न्यायालय ने निजी प्रैक्टिस पर रोक के शासन के आदेश समाप्त नहीं किये हैं, केवल अंतरिम राहत दी है।
राज्य सरकार ने अपने ताजा निर्देशों में आगे कहा है कि जो शासकीय चिकित्सक पूर्व से अपने निवास में उपकरण रख कर निजी प्रैक्टिस कर रहे हैं, उनके विरुध्द कोई दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकेगी। चूंकि निजी प्रैक्टिस पर रोक संबंधी शासन आदेश को न्यायालय द्वारा समाप्त नहीं किया गया है, अत: जो शासकीय चिकित्सक अपने निवास पर यूएसजी अल्ट्रासाउण्ड सोनोग्राफी/कोई अन्य उपकरण रखकर उनके पंजीयन/निजी प्रैक्टिस हेतु स्वीकृति की मांग कर रहे हैं, उन्हें यह स्वीकृति नहीं दी जा सकती है। यदि किसी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी/सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक के द्वारा यह स्वीकृति दी जाती है या दी गई है तो वह स्वयं इसके लिये उत्तरदायी होगा एवं उनके विरुध्द शासन के प्रायवेट प्रैक्टिस पर रोक संबंधी आदेश की अवहेलना मानते हुये अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकेगी।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निजी प्रैक्टिस पर रोक जारी है। उच्च न्यायालय के दण्डात्मक कार्यवाही न करने संबंधी आदेश पर लीगल एडवाईज ली गई थी जिस पर यह कार्यवाही की गई है।
- डॉ नवीन जोशी