
24 फरवरी 2017, मप्र राज्य मानव अधिकार आयोग में अब उप सचिव पद पर सीजीएम यानी मुख्य न्यायिक अधिकारी अथवा जिला जज स्तर का व्यक्ति ही पदस्थ हो सकेगा। इस संबंध में राज्य सरकार ने नया प्रावधान कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि आयोग में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदस्थापना के लिये वर्ष 2011 में मप्र मानव अधिकार आयोग अधिकारी तथा कर्मचारी भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम बनाकर लागू किये गये थे। इन नियमों में उप सचिव पद हेतु प्रावधान था कि इस पर न्यायिक सेवा का व्यक्ति ही पदस्थ होगा तथा इसका वेतनमान रुपये 15600-39100 प्लस 7600 ग्रेड पे होगा।। लेकिन छह साल बाद इन नियमों में सरकार ने बदलाव कर दिया है।
नये बदलाव के अनुसार, अब आयोग में उप सचिव पद पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय एसीपी यानी एश्योर्ड केरियर प्रमोशन ग्रेड) अथवा जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर यानी एडीजे स्तर) ही पदस्थ होगा तथा अब इस पद का नया वेतनमान रुपये 51550-1230-58930-1380-63070 होगा।
राज्य सरकार को उक्त बदलाव इसलिये करना पड़ा है क्योंकि आयोग में उप सचिव पद पर तीन साल के लिये नियुक्ति होती है। सिर्फ न्यायिक सेवा के सदस्यों के प्रावधान के कारण जो जज इस पद पर नियुक्त हो रहे थे उनका डेढ़-दो साल में प्रमोशन हो जाता था और उसे आयोग के उप सचिव का पद छोडऩा पड़ता था।
मप्र मानव अधिकार आयोग उप सचिव रवीन्द्र प्रताप सिंह चुण्डावत का कहना है कि आयोग में उप सचिव पद पर आने वाला जज तीन साल तक रहे इसीलिये सरकार ने नियमों में यह बदलाव किया है।
- डॉ नवीन जोशी