
मध्यप्रदेश सरकार ने नौ और वनोपजों को ट्रांजिट पास लेकर उसका परिवहन करके ले जाने से छूट प्रदान कर दी है। इनमें नारियल, खजूर एवं ताड़ के वृक्ष भी शामिल हैं। शेष छह वनोपज आकाश नीम, अगस्त यानी सिसवानिया ग्राण्डी फलोरा, पेपर मलबरी यानी ब्राउसेन्सिया पपेरीफेरा, पांजारा यानी एरिथिना सबरोजा, झदेशड़ा यानी व्वाईन्टियाना एलाटा तथा कस्तार यानी अनबीझिया अमारा शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 13 दिसम्बर 2000 को राज्य सरकार ने भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत मप्र अथवहन वनोपज नियम बनाकर उन्हें प्रभावशील किये थे। इस नियम के तहत किसी भी वनोपज का मप्र राज्य में या उसके बाहर या उसके अंदर अभिवहन पास यानी टांजिट पास के बगैर परिवहन नहीं किया जा सकता था। इन्हीं नियमों में प्रारंभ में ग्यारह वनोपजों को टांजिट पास के बिना परिवहन की छूट दी गई थी। इसके बाद 42 और वनोपजों को बिना टांजिट पास के परिवहन की छूट दी गई तथा अब ताजा छूट नौ और वनोपजों के लिये दे दी गई है। इस प्रकार अब बिना टांजिट पास के कुल बासठ वनोनजों का परिवहन किया जा सकेगा।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि उक्त छूट प्राप्त बासठ वनोपजों के परिवहन हेतु कोई व्यक्ति टांजिट पास मांगता है है तो वन विभाग के अधिकारी उसे प्रदान करेंगे अन्यथा बिना टांजिट पास के भी व्यक्ति इनका परिवहन कर सकेगा।
वन विभाग के एक आला अधिकारी ने बताया कि नौ और वनोपजों को बिना टांजिट पास के परिवहन करके ले जाने की छूट प्रदान की गई है। आकाश नीम फर्नीचर हेतु उपयोग में आता है जबकि शेष वनोपजों का भी अलग उपयोग होता है तथा बहुधा निजी व्यक्ति इनका उत्पादन करते हैं।
- डा.नवीन जोशी