
3 अप्रैल 2017, राज्य सरकार ने सात साल पहले वर्ष 2010-11 से प्रारंभ की त्रैमास बजट आवंटन की व्यवस्था खत्म कर दी है। अब आगामी 1 अप्रैल 2017 से यानी वर्ष 2017-18 के वित्तीय वर्ष में सरकारी विभागों एवं कार्यालयों को बजट आवंटन की नई व्यवस्था कर दी है।
इस संबंध में गुरुवार को वित्त विभाग ने सभी विभागों एवं समस्त बजट नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है। निर्देश में कहा गया है कि राज्य शासन द्वारा वर्ष 2010-11 से आयोजना बजट के लिये त्रैमासिक आहरण व्यवस्था लागू की गई थी। वर्ष 2017-18 से आयोजना तथा आयोजनेत्तर के विभेदीकरण को समाप्त किया जा चुका है। अत: त्रैमासिक आहरण की पूर्व व्यवस्था के आदेश को अधिक्रमित कर अब वित्त वर्ष 2017-18 के लिये बजट आहरण की इस प्रकार व्यवस्ािा रहेगी : एक, वित्तीय वर्ष के पहले तथा दूसरे त्रैमास के लिये उपब्ध बजट के व्यय के लिये, प्रथम छह माह के लिये स्थापना व्यय (जो वर्ष में कुल बजट का करीब 25 प्रतिशत होता है जिसमें मुख्यत: वेतन एवं भत्ते शामिल होते हैं) को छोड़कर 45 प्रतिशत की अधिकतम सीमा एवं तृतीय एवं चतुर्थ मास के लिये वित्तीय वर्ष में उपलब्ध बजट आवंटन के 30 प्रतिशत की सीमा में अधिकतम व्यय किया जा सकेगा।
दो, पूर्व त्रैमासों की अव्ययित राशि चतुर्थ मास में व्यय करने की अनुमति देने के लिये तथा किन्हीं विशिष्ट कारणों से भिन्न मापदण्ड आवश्यक होने पर वित्त विभाग से अनुमति प्राप्त करना होगी।
वित्त विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आयोजना एवं गैर आयोजना व्ययों का अंतर समाप्त करने के कारण अब त्रैमास बजट आवंटन की व्यवस्था गैर जरुरी हो गई है। अब छह-छह माह में बजट व्यय करना होगा जिसके लिये व्यय सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।
- डॉ नवीन जोशी