
11 अप्रैल 2017, राज्य सरकार ने हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूलों को मान्यता देने के संबंध में नये नियम जारी कर दिये हैं।
दो साल पहले 11 फरवरी 2015 को जारी मान्यता संबंधी नियमों में जिला कलेक्टरों को मान्यता देने के अधिकार थे जो अब नये नियमों में छीन लिये गये हैं तथा अब स्कूल शिक्षा विभाग के संभागीय संयुक्त संचालक को मान्यता देने के अधिकार दे दिये गये हैं।
इसी प्रकार पहले प्रावधान था कि हाईस्कूल हेतु न्यूनतम 4 हजार वर्गफुट तथा हायर सेकेण्ड्री हेतु न्यूनतम 5600 वर्गफुट भूमि मान्यता हेतु जरुरी होगा लेकिन अब प्रावधान किया गया है कि हाईस्कूल या हायर सेकेण्ड्री स्कूल हेतु एक एकड़ भूमि होनी चाहिये और निर्मित क्षेत्र राष्ट्रीय भवन संहिता में विनिर्दिष्ट मानकों के अनुसार होना चाहिये।
मिलेगी आनलाईन मान्यता :
नये मान्यता नियमों के अनुसार, हाईसकूल एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूल हेतु एमपी आनलाईन के माध्यम से आनलाईन आवेदन करना होगा। हाईस्कूल हेतु ढाई सौ छात्र संख्या हेतु 25 हजार रुपये, 251 से 500 छात्र संख्या हेतु 35 हजार रुपये, 501 से 750 छात्र संख्या हेतु 50 हजार रुपये एवं 751 से अधिक छात्र संख्या हेतु 75 हजार रुपये सुरक्षा निधि जमा कराना होगी जबकि हायर सेकेण्ड्री स्कूल हेतु ढाई सौ छात्र संख्या हेतु 40 हजार रुपये, 251 से 500 छात्र संख्या हेतु 50 हजार रुपये, 501 से 750 छात्र संख्या हेतु 75 हजार रुपये एवं 751 से अधिक छात्र संख्या हेतु एक लाख रुपये सुरक्षा निधि जमा कराना होगी। इसी प्रकार मान्यता फीस हाईस्कूल हेतु 20 हजार रुपये एवं हायर सेकेण्ड्री स्कूल हेतु 25 हजार रुपये होगी।
यह करना भी जरुरी होगा :
- वेबसाईट बनाकर स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाईट से लिंक करना होगा।
- शिक्षकों को उनके आधार लिंक बैंक अकाउण्ट में वेतन का भुगतान करना होगा।
- छात्र एवं छात्राओं हेतु पर्याप्त संख्या में शौचालय होने चाहिये एवं साफ पेयजल की व्यवस्था होना चाहिये।
- मनोविज्ञान में स्नातक एक अंशकालिक परामर्शी रखना होगा।
- स्कूल में प्रतिदिन राष्ट्रीय ध्वज फहराना होगा एवं कक्षाओं के प्रारंभ होने से पूर्व राष्ट्रीय गीत गाया जायेगा।
- स्कूल में योग सहित खेल गतिविधियां संचालित की जायेंगी तथा प्रत्येक सप्ताह खेल से संबंधित गतिविधि के लिये कम से कम एक पीरियड अनिवार्य रुप से रखना होगा।
- स्कूल के पुस्तकालय में सरकार द्वारा प्रतिबंधित पुस्तकें नहीं रखी जायेंगी तथा ऐसी पुस्तकें भी नहीं रखी जायेंगी जो भाषा, क्षेत्र, सम्प्रदाय या जातिवाद को बढ़ावा देती हों।
- डा.नवीन जोशी