अब ई पर्ची और बायोमीट्रिक डीवाईस भी मतदाता की पहचान.....

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Place: Bhopal                                                👤By: DD                                                                Views: 17940

17, अप्रैल 2017, आने वाले नगरीय निकाय चुनावों में अब मतदाता की पहचान हेतु राज्य निर्वाचन आयोग के चुनाव एप जनित ई-फोटोयुक्त मतदाता पर्ची तथा बायोमीट्रिक डिवाईस पर आधार नम्बर से पहचान भी मान्य होंगे। इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग ने मप्र नगरपालिका निर्वाचन नियम 1994 के तहत नया प्रावधान कर दिया है।



आयोग ने इससे पहले 10 जुलाई,2014 को मतदाता की पहचान हेतु 18 दस्तावेज निर्धारित किये थे जिनमें अब दो और उक्त दस्तावेजों की वृध्दि कर दी गई है। पहले के 18 दस्तावेज हैं : राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी फोटोयुक्त मतदाता पर्ची, फोटोयुक्त आधार कार्ड, स्वतंत्रता सेनानी पहचान-पत्र, रेल्वे पहचान-पत्र, पेंशन दस्तावेज, अजाजजा/ओबीसी प्रमरण-पत्र, स्टुडेंट आईडेंटिटी कार्ड, राज्य/केंद्र/सार्वजनिक उपक्रम/स्थानीय निकाय/निजी औद्योगिक संस्थानों द्वारा अपने कर्मचारियों को जारी सेवा पहचान-पत्र, पैन कार्ड, ड्राईविंग लायसेंस, पासपोर्ट, निराश्रित प्रमाण-पत्र, विकलंगता प्रमाण-पत्र, फोटोयुक्त सम्पत्ति दस्तावेज, शस्त्र लायसेंस, बैंक/किसान/डाकघर पासबुक, राशन कार्ड/नीला राशन कार्ड/पीला राशन कार्ड तथा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदाय किया गया मतदाता पहचान-पत्र।



यह भी किया बदलाव :

वर्ष 2014 में राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रावधान किया था कि यदि कोई मतदाता 18 मतदाता पहचान दस्तावेज में से एक भी प्रस्तुत करने में असफल रहता है तो मतदान केंद्र का पीठासीन अधिकारी स्थानीय शासकीय विद्यालय के शिक्षक, उपलब्ध किसी शासकीय कर्मचारी अथवा किसी प्रतिष्ठित स्थानीय निवासी से मतदाता की पहचान स्थापित कराने के उपरान्त उसे मत देने हेतु अधिकृत कर सकेगा। लेकिन अब दो और दस्तावेजों का प्रावधान करने के बाद इस प्रावधान को खत्म कर दिया गया है।



निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि एप से मतदाता पर्ची और आधर नंबर पहचान डिवाईस का पायलट प्रोजेक्ट के तहत चार नगरीय निकायों हरदा, पसान, अमरकंटक एवं माण्डव में उपयोग किया जा चुका है तथा अब आने वाले सभी नगरीय निकाय चुनावों में भी इनका उपयोग करने का नियमों के तहत प्रावधान कर दिया गया है। आधार पहचान हेतु डिवाईस उपलब्ध कराने का कार्य संबंधित एजेन्सी को सौंपा जायेगा। शासकीय शिक्षकों, शासकीय कर्मचारियों एवं प्रतिष्ठित व्यक्ति से मतदाता की पहचान स्थापित करने का प्रावधान वर्ष 2014 के तुरंत बाद खत्म कर दिया गया था।





- डा.नवीन जोशी



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