
1 अगस्त 2017। मप्र विधानसभा का मानसून सत्र निर्धारित समयावधि से दो दिन पहले खत्म हो गया जिसके कारण मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा लाया गया साहूकारी प्रथा के माध्यम से किसानों से जमकर सूदखोरी करने वाला विधेयक इस मानसूत्र में नहीं आ सका। अब यह विधेयक अगले शीतकालीन सत्र में सदन में पेश किया जायेगा।
ज्ञातव्य है कि विधानसभा में सरकार के अलावा विपक्ष के सदस्य भी अपना विधेयक प्रस्तुत कर सकते हैं। बहुधा बहुमत नहीं होने के कारण विपक्ष का विधेयक पारित नहीं हो पाता है। बुधवार को समाप्त हुये मानसून सत्र में यह विधेयक शुक्रवार को सदन में रखा जाने वाला था लेकिन सदन की कार्यवाही इससे पहले ही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित कर दी गई।
यह विधयेक सीहोर जिले की इच्छावर विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक शैलेन्द्र पटेल ने तैयार किया था और विधानसभा सचिवालय को सौंप दिया था। इस विधेयक की प्रतियां विस सचिवालय ने सभी विधायकों को अध्ययन हेतु वितरित भी कर दी थीं। इस अशासकीय विधेयक में कहा गया है कि साहूकारी के पंजीकरण में पंचायत स्तर पर अत्यधिक कमी आई है एवं अवैध रुप से साहूकारों के कारोबार में प्रदेश भर में तेजी से बढ़ौत्तरी हुई है, जिसके कारण साहूकारों पर सरकार का नियंत्रण न के बाराबर होने से साहूकारों की मनमानी एवं अवैध साहूकारी प्रदेश में बढ़ रही है। इसके फलस्वरुप आम आदमी अवैध सूदखोरी के कारण आर्थिक रुप से कमजोर होता जा रहा है। इस विधेयक में यह भी कहा गया है कि इस विधेयक के पारित होने से साहूकारों पर सरकार का सीधा नियंत्रण होगा, अवैध सूदखोरों की रोकथाम होगी तथा प्रत्येक साहूकार का पंजीयन विधिवत होगा ताकि आम आदमी पर अनावश्यक आर्थिक भार न पड़े, क्योंकि प्रदेश में किसानों की बढ़ती हुई आत्महत्या के पीछे एक कारण अवैध सूदखोरी भी है, जिसकी रोकथाम के लिये संशोधन विधेयक रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र में कांग्रेस ने किसान आंदोलन पर स्थगन प्रस्ताव दिया था जिस पर चर्चा के दौरान साहूकारों पर नकेल कसने की बातें भी कही गईं थीं। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्टब् किया था कि राष्ट्रपति के पास साहूकारी पर नकेल कसने संबंधी प्रावधान उनकी स्वीकृति हेतु भेजे गये हैं तथा वहां से स्वीकृति आने पर इस संबंध में सरकारी विधेयक पेश किया जायेगा।
विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून सत्र में कांग्रेस विधायक शैलेन्द्र पटेल ने अशासकीय मप्र साहूकार संशोधन विधेयक 2017 पेश किया था जिसे शुक्रवार को सदन में चर्चा हेतु रखा जाना था, लेकिन बुधवार को ही सत्र खत्म होने से यह नहीं आ पाया। यह विधेयक अभी लैप्स नहीं हुआ है तथा अगले शीतकालीन सत्र में रखा जायेगा।
- डॉ नवीन जोशी