
दलितों पर अत्याचार के मुद्दे पर आज एक बार फिर संसद में हंगामे के आसार है। आज लोकसभा में दलितों के मुद्दों पर चर्चा होगी। एक तरफ सरकार इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखेगी तो वहीं विपक्ष, मोदी सरकार को एक बार फिर घेरेगा। इसके लिए कांग्रेस, बीएसपी और जेडीयू समेत सभी विपक्षी दलों ने अपनी कमान कस ली है।दरअसल, बीते कुछ समय से दलितों के साथ हो रही अत्याचार की घटनाओं से रोष का माहौल है फिर चाहे ऊना कांड, संभल कांड और उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ हो रहे अत्याचार के मामले हों। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दलितों के अत्याचार पर चिंता व्यक्त की थी। वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने दलितों पर हो रहे हमलों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला किया था उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार में दलितों पर अत्याचार के मामले में बढ़े हैं।कांग्रेस ने दलितों पर हमलों के मुद्दे पर 8 अगस्त को सदन से बहिर्गमन किया और मुद्दे पर गंभीर न होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथ लिया। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुद्दे को उठाया और प्रश्नकाल के खत्म होने के बाद इस पर चर्चा की मांग की। तेलंगाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की ओर संकेत करते हुए खड़गे ने कहा था दलितों पर हमलों से निपटने के लिए मोदी जी पूरी तरह गंभीर नहीं हैं।गौरतलब है कि तेलंगाना के अपने पहले दौरे पर मोदी ने स्पष्ट किया कि जाति आधारित भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने जातिगत मुद्दों के राजनीतिकरण को खत्म करने का आह्वान किया और आरोप लगाया कि कुछ पार्टियां, जो दलितों को अपना वोट बैंक समझती हैं और केंद्र सरकार द्वारा किए गए पहलों से सशंकित हैं, दलितों को प्रभावित करने के लिए इस तरह के मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रहे हैं।मोदी ने किसी पार्टी का नाम लिए बिना कहा है कि मैं ऐसे सभी लोगों से यह कहना चाहता हूं कि यदि आप हमला करना चाहते हैं, तो मुझपर कीजिए मेरे दलित भाइयों पर नहीं। यदि आप गोली मारना चाहते हैं, तो मुझे मारिए, मेरे दलित भाइयों को नहीं।