
अक्टूबर 27, 2016, रक्षा मामलों के दस्तावेज़ों के साथ हिरासत में लिए गए पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी को डिप्लोमेटिक इम्युनिटी के तहत छोड़ दिया गया है.
दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कांफ्रेस में यह जानकारी देते हुए बताया कि इस व्यकित के पास कथित तौर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की तैनाती से जुड़े दस्तावेज़ थे.
दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर रविंदर यादव ने पत्रकरों को बताया कि पकड़े गए महमूद अख़्तर पाकिस्तानी उच्चायुक्त के वीज़ा सेक्शन में काम करते थे और उनके पास से कथित तौर पर सीमा पर बीएसएफ की तैनाती से जुड़े दस्तावेज़ मिले थे.
ख़बरों के अनुसार महमूद अख़्तर पर जासूसी करने और रक्षा से जु़ड़े दस्तावेज़ों को लीक करने का आरोप था.
यादव के मुताबिक पूछताछ के दौरान अख़्तर ने बताया कि उनके पास डिप्लोमैटिक इम्युनिटी है और इस बात की पुष्टि करने के बाद अख़्तर को पाकिस्तानी दूतावास के हवाले कर दिया गया.
रविंदर यादव ने बताया कि जासूसी का ये काम पिछले डेढ़ साल से चल रहा था और पिछले छह महीने में पुलिस के पास इस बात की जानकारी आई थी. उन्होंने कहा कि दोनो भारतीय कथित तौर पर दस्तावेज़ों को महमूद अख़्तर को देते थे और इसके बदले उन्हें पैसे दिए जाते थे.
साथ में दो भारतीयों को भी हिरासत में लिया गया था और उनसे पूछताछ जारी है.
खबरें हैं कि भारत ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब किया है. पाकिस्तान उच्चायोग ने इन आरोपों का खंडन किया है.
पाकिस्तान उच्चायोग के सूत्रों के अनुसार उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारतीय विदेश सचिव के सामने इस मामले का कड़ा विरोध किया और बताया कि ये वियना कन्वेंशन का उल्लंघन है.
सूत्रों के अनुसार उच्चायुक्त ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि भविष्य में पाकिस्तान के कर्मचारियों के साथ ऐसाी घटना न हो.
भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच कई दिनों से फ़ायरिंग जारी है जिसमें दोनो तरफ़ रहने वाले लोग मारे गए हैं.
दोनो ही पक्ष एक दूसरे पर बिना किसी उकसावे के एक दूसरे पर फ़ायरिंग का आरोप लगाते रहे हैं.
भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में चरमपंथी हमले में 19 भारतीय जवानों के मारे जाने के बाद से दोनो देशों के संबंध और खराब हो गए हैं.
भारत की ओर से दावा किया गया था कि उसकी सेना ने लाइन ऑफ़ कंट्रोल से जुड़े इलाकों में सर्जिकल स्ट्राइक्स की थी लेकिन पाकिस्तान ने इस दावे का खंडन किया था.
वार्ता/भाषा