यूपी में 'योगी' राज, केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा होंगे यूपी के दो डिप्टी सीएम

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Place: Bhopal                                                👤By: DD                                                                Views: 19027

उत्तर प्रदेश में एक योगी का राजयोग शुरू होने वाला है। योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के 32वें मुख्यमंत्री चुने लिए गए हैं। वहीं यूपी बीजेपी के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और लखनऊ के पूर्व मेयर दिनेश शर्मा को डेप्युटी सीएम बनाया गया है। नई सरकार 19 मार्च यानी रविवार को शपथ ग्रहण करेगी।



लखनऊ में बीजेपी विधायक दल की बैठक में योगी के नाम पर मुहर लग गई। लेकिन ये फैसला आसान नहीं था और लोगों को थोड़ा चौंकानेवाला भी लग सकता है क्योंकि आदित्यनाथ जिस कट्टरवादी हिंदुत्व की बात करते रहे हैं वो मोदी के विकास की राजनीति से थोड़ी अलग है, तो क्या योगी के राजतिलक से उत्तर प्रदेश में बीजेपी की राजनीति बदलेगी या हम आदित्यनाथ को बदलते देखेंगे या ये 2019 के लिए बीजेपी की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। फैसला लेने में बीजेपी लीडरशिप ने जो देरी की क्या वो पार्टी के अंदर की खींचतान को दर्शाता है और ऐसे में क्या योगी उत्तर प्रदेश में पार्टी के सर्वमान्य नेता होंगे। एक सवाल ये भी है कि राजकाज में अनुभव ना होना क्या मोदी राज में एक यूएसपी बनती जा रही है!



आपको बता दें कि योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह वो 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने। योगी यूपी (गोरखपुर) से सांसद हैं उन्होंने लोकसभा में लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की है। योगी आदित्यनाथ विवादित बयानों के चलते चर्चा में रहे हैं और 2007 गोरखपुर दंगे का मुख्य आरोपी हैं। योगी आदित्यनाथ हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक और कट्टर हिंदूत्ववादी चेहरा हैं।



यूपी की सियासत में बीजेपी के चेहरों की बात करें तो महंत आदित्यनाथ की शख्सियत को नज़रअंदाज कर पाना मुश्किल है। कभी पूर्वांचल तक सिमटी आदित्यनाथ की शख्सियत राष्ट्रीय स्तर पर भी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। हमेशा भगवा कपड़े पहनने वाले औसत कदकाठी की ये शख्सियत किसी पहचान की मोहताज नहीं है। पूर्वांचल के गोरखपुर से लगातार 5 बार सांसद रहने वाले महंत आदित्यनाथ यूपी के सर्वोच्च तक आखिर पहुंच ही गए। पूर्वांचल में योगी समर्थक अक्सर ये कहते मिल जाते हैं कि आदित्यनाथ ने केन्द्र में मंत्री का पद सिर्फ इसलिए नहीं लिया क्योंकि उनका लक्ष्य यूपी का मुख्यमंत्री बनना था। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है ये खुद योगी जानें। मगर हां योगी ने कभी भी ना तो इस दावे का इकरार किया ना दावे से इनकार किया।



साल 1998 में सबसे युवा सांसद के तौर पर चुनकर संसद पहुंचे वाले योगी आदित्यनाथ की क्षेत्र में लोकप्रियता का आलम ये है कि चुनाव दर चुनाव इनकी जीत का अंतर बढ़ता चला गया। गोरखपुर, बस्ती और आज़मगढ़ मंडल की कम से कम 3 दर्जन सीटों पर सीधा प्रभाव रखने वाले योगी कई बार पार्टी लाइन से अलग भी जाते रहे हैं। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने योगी को साधने में कभी चूक नहीं कि उपचुनावों से लेकर इन चुनावों तक योगी बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे और पूरब के इस संन्यासी ने पश्चिम में भी खूब जलवा बिखेरा और हर सभा में भारी भीड़ खींची।



पूर्वांचल में योगी की अपनी शख्सियत है। कई मामलों में पार्टी के आधिकारिक लक्ष्मण रेखा के बाहर भी दखल है। हिन्दू युवा वाहिनी के नाम से संगठन बनाकर योगी ने पूरे पूर्वांचल में युवाओं में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है जिसे भुनाने में इस बार बीजेपी ने कोई कसर नहीं छोड़ी। हालांकि योगी का बेबाक अंदाज़ और हिन्दुत्ववादी शख्सियत उनकी सियासत की सबसे बड़ी खूबी है लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर ये दोनों खूबी उनके लिए मुश्किलें भी पैदा कर सकती हैं।



उत्तर प्रदेश में नए मुख्यमंत्री चुने गए योगी आदित्यनाथ के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। उनको ऊंची जाति और ओबीसी नेताओं के बीच तालमेल बनाना होगा। विकास के नारे पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी को रोजगार बढ़ाने में जोर देना होगा। उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 38,000 रुपये है जो औसत राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय की आधी है। वहीं यूपी की आबादी का 22 फीसदी हिस्सा शहरों में रहता है जबकि शहरीकरण का राष्ट्रीय औसत 31 फीसदी है। प्रदेश का स्वास्थ्य पर खर्च देश के औसत से 70 फीसदी कम है जबकि औद्योगिक विकास के पायदान पर उत्तर प्रदेश देश के आखिरी 5 राज्यों में आता है। देखना होगा कि योगी आदित्यनाथ इन मोर्चों पर कैसा प्रदर्शन कर पाते है।



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